विज्ञापन

बात करते हो।

सुनील देव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पत्थरों के दौर में वफ़ा की बात करते हो।।
        
                                                    
                            
ज़मीं पर रहकर आसमां की बात करते हो।।

दिल को दिल ही रहने दो कोई नाम ना दो,,
जो देखा नहीं उस राब्ता की बात करते हो।।

धड़कनें है तो धड़केगी धड़कनें से क्या होगा,,
तस्वीरें देखके क्या जफ़ा की बात करते हो।।

गुलों के बीच खारों का अगर वज़ूद है तो हैं,,
बेकार गुल के लिए दुआ की बात करते हो।।

सुनता नहीं जब कोई तो फिर बोलते हो क्यों,
बहरे हुए सब तो खामखा ही बात करते हो।।

आवाज़ देकर देख ली पर आया ना कोई भी,,
और तुम फिर भी ख़्वाजा की बात करते हो।।

आंखों को बंद करके भी कब तक चलोगे देव,,
क्या ऐसे दौर में भी ख़ुदा की बात करते हो।।
-सुनील देव
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile