पत्थरों के दौर में वफ़ा की बात करते हो।।
ज़मीं पर रहकर आसमां की बात करते हो।।
दिल को दिल ही रहने दो कोई नाम ना दो,,
जो देखा नहीं उस राब्ता की बात करते हो।।
धड़कनें है तो धड़केगी धड़कनें से क्या होगा,,
तस्वीरें देखके क्या जफ़ा की बात करते हो।।
गुलों के बीच खारों का अगर वज़ूद है तो हैं,,
बेकार गुल के लिए दुआ की बात करते हो।।
सुनता नहीं जब कोई तो फिर बोलते हो क्यों,
बहरे हुए सब तो खामखा ही बात करते हो।।
आवाज़ देकर देख ली पर आया ना कोई भी,,
और तुम फिर भी ख़्वाजा की बात करते हो।।
आंखों को बंद करके भी कब तक चलोगे देव,,
क्या ऐसे दौर में भी ख़ुदा की बात करते हो।।
-सुनील देव
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