विज्ञापन

नारी तू सर्व ज्ञानी है

Samradhi Malpani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नारी तू सर्व ज्ञानी है।
        
                                                    
                            
माना तुझ में भी खामी है।
तू संशोधन करती जाती है।
नर निरा मूर्ख प्राणी है।
सर्व समर्थ होना उसकी
कामयाबी है?
बोझिल होना उसका
जिम्मेदारी है ?

वो भी तो अधुरा है।
तेरे संग ही तो पूरा है।
आधा सच तेरा है।
आधा सच उसका है।
पूरा सच कौन जानता है?

तू धीरज है, वो प्रयास है।
तू शक्ति है, वो रूपक है।
तू चोटिल है, वो क्षमा - प्रार्थी है।

तुझ से ही तो उसे एहसास है।
कर गुजरने की ललकार है।

प्रेम पात्र है तो उस के जीवन का।
लेखन तू ही तो करती जाती है।

तेरा जग भी तो उस बिन सूना है।
तेरी किलकारी उसका देना है।

तू भी तो सब जानती है।
तू सर्व ज्ञानी है।

नर को इंसा, इंसा को प्रेम
तू ही तो बनाती है।

नारी तू सर्व ज्ञानी है।
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all