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केरल में बाढ़

Sam Samrat

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस महकते सावन में
        
                                                    
                            
क्या उत्सव मनाए हम
सोचते है कुछ असहायों का
केरल में हाथ बटाए हम
माना कि सावना मनमोहक
हरदम ही रहता है
पर आज कल ये मेरे मन को
सदा ही विकल करता है
कैसे अभी बहक जाऊं मैं
सावन की नशीली रातो में
जबकि मेरे भाई बहन कुछ
केरल के रो रहे हैं रातो में
क्या कारण हो सकता है
ऐसे घटना चक्रों का
ये सीधा परिणाम है
अमानवीय कुचक्रो का
रब की दुहाई देते है
पेड़ खुद ही काट लेते है
क्या करेंगे रब इसमें
जब हम अपने ही संहारक हो
अपनी ही मानवता के
खुद ही हृदय विदारक हो
तो आइए एक मुहिम चलाये
विन्न विन्न पेड़ लगाए
अपनी प्यारी धरती माँ को
वृक्षो से हरा भरा बनाए
बाढ़, ओला, सूखा,भूकंप
इन सबों का नामोनिशान मिटाए

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8 वर्ष पहले
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