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आज की स्वतंत्रता

sakshi singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं स्वतंत्रता
        
                                                    
                            
मेरी कहानी में किसी के खून का किरदार
कितना अहम कितना खास
किसी के कलम की स्याही
चलती किसी के चरखे से
कोई तड़पता भूख से
तो किसी को पड़ते कोड़े दिन रात
कभी मै लिख जाती आजादी
तो कही बहती स्वाधीनता की आंधी
मेरी ही खातिर
कुछ कहानियां मिट गई, कुछ मिटा दी गई
मैं आज की स्वतंत्रता
खुद अपनी ही सीमाओं से परे
धर्म, जाति, रीति रिवाज हर बंधन से आजाद
मानवता ही तुम्हारा एकमात्र धर्म
शिक्षा तुम्हारा पहला अधिकार
तुमसे कहती हूं फिर से एक बार
तुम चुनो अपनी आजादी अपना अधिकार
2 महीने पहले
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