मैं स्वतंत्रता
मेरी कहानी में किसी के खून का किरदार
कितना अहम कितना खास
किसी के कलम की स्याही
चलती किसी के चरखे से
कोई तड़पता भूख से
तो किसी को पड़ते कोड़े दिन रात
कभी मै लिख जाती आजादी
तो कही बहती स्वाधीनता की आंधी
मेरी ही खातिर
कुछ कहानियां मिट गई, कुछ मिटा दी गई
मैं आज की स्वतंत्रता
खुद अपनी ही सीमाओं से परे
धर्म, जाति, रीति रिवाज हर बंधन से आजाद
मानवता ही तुम्हारा एकमात्र धर्म
शिक्षा तुम्हारा पहला अधिकार
तुमसे कहती हूं फिर से एक बार
तुम चुनो अपनी आजादी अपना अधिकार
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