विज्ञापन

निकले हैं सफर में तो मुश्किलें कौन देखेगा

Sakshi Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            निकले हैं सफर में तो मुश्किलें कौन देखेगा
        
                                                    
                            
सफलता के सिवाय पांव के छाले कौन देखेगा
देखते तो है सब मेरी झूठी हंसी को
पर मेरे अंदर जलती मशाले कौन देखेगा
मिल जाएगी मंज़िल तो घमंडी कह देते है बिन सोचे
मंज़िल में आई मुश्किलें कौन देखेगा
अकेले रहने पर दे देते है नाम गुरूर का
सब से दुखे मन को कौन देखेगा
चमक गया है सोने जैसा लोग कह देते है आसानी से
सोना बनने के लिए सहे जलन को कौन देखेगा
 
5 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

priyanka samariya

8 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10819 कविताएं

View Profile

Kanojiya Manisha

10 कविताएं

View Profile