निकले हैं सफर में तो मुश्किलें कौन देखेगा
सफलता के सिवाय पांव के छाले कौन देखेगा
देखते तो है सब मेरी झूठी हंसी को
पर मेरे अंदर जलती मशाले कौन देखेगा
मिल जाएगी मंज़िल तो घमंडी कह देते है बिन सोचे
मंज़िल में आई मुश्किलें कौन देखेगा
अकेले रहने पर दे देते है नाम गुरूर का
सब से दुखे मन को कौन देखेगा
चमक गया है सोने जैसा लोग कह देते है आसानी से
सोना बनने के लिए सहे जलन को कौन देखेगा
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