सेना के सम्मान में, हर
मस्तक खुद झुक जाता है,
त्याग, बलिदान उनका,जब
सबको याद आता है,
मातृभूमि की सेवा कर, जो
धरती का ऋण चुकाते है
पहाड़, जंगल, रेगिस्तान में, जो
खूब तपाये जाते हैँ,
कठिन ट्रेनिंग ऐसी कि,
फ़ौलाद बनाए जाते हैं,
कोई और नहीं,वो
इंडियन आर्मी कहलाते है
ऑठो पहर सीमा पर, जो
दिन रात खड़े रहते हैं
तीज त्योहार रीति रिवाज
कितना कुछ छोड़ें रहते हैं
कठिन परीक्षा जैसी भी
नहीं कभी जो घबराते
बुलंद हौंसले इतने कि
पर्वतों से भी टकराते,
भारत माता की रक्षा की
सौगंध जो खाते हैं,
कोई और नहीं, वो
इंडियन आर्मी कहलाते हैं
शेरदिली बहादुरी का जिसकी,
दुश्मन में खौफ रहता है,
देशभक्ति का रगों में जिसकी,
लहू दौड़ता रहता है,
जंग के मैदान में, जो
दुश्मन को धूल चटाते हैं
देश की खातिर हर गोली, जो
छाती पर खा जाते हैं
सीमा पर मर मिटकार, जो
अमर शहीद हो जाते हैं,
कोई और नहीं,वो
इंडियन आर्मी कहलाते हैं l
-सचिन शर्मा