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निकली हूं अपनी तलाश में

Saanvi Dubey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब भी जीवन में कुछ बड़ा करने का मन करता है
        
                                                    
                            
तो लोग क्या कहेंगे इस बात का हमेशा डर लगता है।।
हां में डरती हूं,
मैं डरती हूं कि कोई मेरा मजाक ना उड़ाए।
चार लोगों के सामने मुझ पर उंगली ना उठाएं।।
और चाहती हूं कि कोई मेरी पीठ थपथपा आए और मैं कौन हूं इसका एहसास कराये।।
क्योंकि ऊपर वाला जब भी दुनिया में किसी को लाता है
वह हमेशा उसे कुछ गुण्डों से सजाता है।।
और जिन रातों को लोग अपने कमरे में सो रहे थे
तुम उन्हीं रातों को मंदिर में बैठे रो रहे थे।।
जब लोग कांटे चुभने पर अपनी तकलीफ बता रहे थे तुम चले वाले पैरों को लेकर भी मुस्कुरा रहे थे।।
यकीन मानो एक दिन तुम्हारा भी नाम होगा
और यही तुम्हारे संघर्षों का इनाम होगा।।
जो छोड़ के गए हैं वो पछताएंगे
एक दौर ऐसा आएगा जब सब अपने बन जाएंगे
3 घंटे पहले
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