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निकली हूं अपनी तलाश में

                
                                                         
                            जब भी जीवन में कुछ बड़ा करने का मन करता है
                                                                 
                            
तो लोग क्या कहेंगे इस बात का हमेशा डर लगता है।।
हां में डरती हूं,
मैं डरती हूं कि कोई मेरा मजाक ना उड़ाए।
चार लोगों के सामने मुझ पर उंगली ना उठाएं।।
और चाहती हूं कि कोई मेरी पीठ थपथपा आए और मैं कौन हूं इसका एहसास कराये।।
क्योंकि ऊपर वाला जब भी दुनिया में किसी को लाता है
वह हमेशा उसे कुछ गुण्डों से सजाता है।।
और जिन रातों को लोग अपने कमरे में सो रहे थे
तुम उन्हीं रातों को मंदिर में बैठे रो रहे थे।।
जब लोग कांटे चुभने पर अपनी तकलीफ बता रहे थे तुम चले वाले पैरों को लेकर भी मुस्कुरा रहे थे।।
यकीन मानो एक दिन तुम्हारा भी नाम होगा
और यही तुम्हारे संघर्षों का इनाम होगा।।
जो छोड़ के गए हैं वो पछताएंगे
एक दौर ऐसा आएगा जब सब अपने बन जाएंगे
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एक घंटा पहले

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