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मैं और प्रकृति

S Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लगता था सब कवियों और दंतकथाओं की है बेला
        
                                                    
                            
मगर जाना जब पास से तो
मन रूपी दर्पण साफ होकर बोला.....!
बैठी टोंस पार थी ढल साझं रही थी
मानो प्रकृति मुझें गोद लिए बैठी थी
दृश्य लोभित हो उठा था
मानों लहरें मुझ छुकर जा रहीं हो
हवाऍ संदेशा ले आ जा रहीं हो।
जिस प्रकार आसमान बादलों ओर पक्षियों से जुडा़ है
ठीक उसी तरह टोंस नदी- हिमाचल प्रदेश ओर उतराखंड को जोडी है!
नदी का प्रेम ऐसे प्रतित होता जैसा मछली का पानी से।
न जाने कितने सवाल गठित थे
अचानक दूर किनारे से आवाज सुनते ही कुंठित हो लिए।
वापिस लौटना न था मगर एक शाश्वत सत्य है
जाते समय हवाएं मानों कह गई फिर लौट आना.....!🍁
- सतोंष शर्मा!
3 महीने पहले
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