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सच्ची मोहब्बत

S. L.

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसे पाने की चाहत खत्म
        
                                                    
                            
कर बैठे हैं हम,

फिर मुलाकात कहीं हो ना जाए
ऐसा गम ले बैठे हैं हम,

कोई शिकायत नहीं हमें उनसे
फिर नजरें झुका कर मर बैठे हैं हम,

क्या तारीफ करें, उनके शब्दों में
उनके लिए अपनी नजरों में
आंसू भर बैठे हैं हम,

फिर से लगता है
उन्हें दिल दे बैठे हैं हम..

- Laxmikiulfat
 
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4 वर्ष पहले
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