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हिंदी शायरी

RUPESH KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काली घटा छाई रही आसमान पर,
        
                                                    
                            
मगर बरसात नहीं हुई।
मैं उसे फोन मिलाता रहा,
मगर उससे मेरी बात नहीं हुई।
उसने कहा था कि सबके सो जाने के बाद कॉल करूंगी,
मुझे लगता है कि,
मेरे महबूब के शहर में आज रात नहीं हुई
2 महीने पहले
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