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सुशांत सिंह राजपूत को समर्पित

Runa Pathak

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक धक्का सा लगा था
        
                                                    
                            
जब तुम गए थे..
आज भी दिल रो रहा है
ऐसा क्यों हो रहा है

मैं ही नहीं,
मेरे जैसे लाखों हैं...
जो तुम्हें रोज़ याद करते हैं
जो तुम्हारी,रोज़ बात करते हैं

सोचतें हैं कि काश
तेरह जून को तुमको कह पाते
कि तुम सर्वोत्तम हो
कि तुम किसी से न कम हो

चले गए तुम
हम सबको उदास करके
चलो हमारी छोड़ो,
कभी सोचा, कैसे रहेंगे
तुम्हारे बिना सब लोग, घर के

कितना समय बीत गया
यह ख़ालीपन...
यह अधूरापन, कम ही नहीं होता
तुम्हें इंसाफ मिले,
अब मन यही बोलता
3 वर्ष पहले
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Anil Pandey

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