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सफलता औरसंघर्ष

Ruchi Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जमीन पर बैठकर क्यों आसमान देखता है
        
                                                    
                            
पंखों को खोल ज़माना उड़ान देखता है
लहरों की तो फितरत होती है शोर मचानेकी
मंजिल उसी की होती है जो नजरों से तूफान देखा है
हर पतंग जानती है लास्ट में उसे कचरे में ही जाना है
लेकिन उससे पहले हमें आसमान छूकर दिखाना है
घोसला बनाने में हम इतने मशगूल हो गए
उड़ने को पंख है हम यह भी भूल गए
उठो जागो ना रुको तब तक
मेहनत करते रहो लक्ष्य प्राप्त न हो जाए जब तक

 
एक महीने पहले
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Aditya Mishra

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