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मां की व्यथा

Ruchi Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उम्र आंधी कट गई दूसरों की बात मानने में
        
                                                    
                            
कभी एक करो कभी तो करो
दूसरों दूसरों को खुश करने में
जब मेरी बारी आई सहारा मांगने की
तब सब मुकर गए जिम्मेदारी निभाने में
जिनके लिए अपनी ख्वाहिश है हर रोज दबाती रही
उन्हें एक पल न लगा हमें छोड़कर जाने में
अब समझ में आया दुनिया में अपना वही है
जो मुश्किल वक्त में खड़ा रहे समझने में नहीं
निभाने में
 
3 महीने पहले
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