दिल में मेरे एक जो रहती है वो लड़की
रोज़ नए रूप बदलती है वो लड़की
देखो ये सितम आइने पे ढा रही हो क्यों
रोज़ मेरे दिल को तुम सता रही हो क्यों
रोज़ रोज़ dp बदलती है वो लड़की
दिल में मेरे एक जो रहती है वो लड़की।
रूप रति का हो या कोई अप्सरा हो तुम
तुम गीत हो,ग़ज़ल हो या अंतरा हो तुम
होंठ जो लहरे तो तरन्नुम बिखर गए
मेरे ज़िंदगी के सारे फिर सुर सँवर गए
रोज़ नए गीत सी लगती है वो लड़की
दिल में मेरे एक जो रहती है वो लड़की।
जुल्फे जो बिखराई तो घटाए छा गई
ख़ुशबू से लिपटी हुई लताएँ छा गई
तुम मेरी ज़िंदगी का हसीन ख़्वाब हो
मेरे दिल के चमन का खिलता गुलाब हो
रोज़ नए फूल सी खिलती है वो लड़की
दिल में मेरे एक जो रहती है वो लड़की।
- रोहित तिवारी