आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

वो लड़की

                
                                                         
                            दिल में मेरे एक जो रहती है वो लड़की
                                                                 
                            
रोज़ नए रूप बदलती है वो लड़की
देखो ये सितम आइने पे ढा रही हो क्यों
रोज़ मेरे दिल को तुम सता रही हो क्यों
रोज़ रोज़ dp बदलती है वो लड़की
दिल में मेरे एक जो रहती है वो लड़की।
रूप रति का हो या कोई अप्सरा हो तुम
तुम गीत हो,ग़ज़ल हो या अंतरा हो तुम
होंठ जो लहरे तो तरन्नुम बिखर गए
मेरे ज़िंदगी के सारे फिर सुर सँवर गए
रोज़ नए गीत सी लगती है वो लड़की
दिल में मेरे एक जो रहती है वो लड़की।
जुल्फे जो बिखराई तो घटाए छा गई
ख़ुशबू से लिपटी हुई लताएँ छा गई
तुम मेरी ज़िंदगी का हसीन ख़्वाब हो
मेरे दिल के चमन का खिलता गुलाब हो
रोज़ नए फूल सी खिलती है वो लड़की
दिल में मेरे एक जो रहती है वो लड़की।

- रोहित तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर