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क्या तट नदी से दोबारा है मिलता कभी?

Rohit Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तट पे बैठा नदी से मैं पूछूं बता,
        
                                                    
                            
क्या तट नदी से दोबारा है मिलता कभी?

हृदय से मेरे तुम निकल जाओगी,
मेरे ख़्वाबों को ऐसे कुचल जाओगी,
प्रेम प्रस्ताव तुमने दिया था मुझे,
क्या पता था कि ऐसे बदल जाओगी।

बस इतना बता के तू अहसान कर
दिल कैसे तुम्हारा है लगता कहीं।
तट पे बैठा नदी से मैं पूछूं बता,
क्या तट नदी से दोबारा है मिलता कभी?

तेरी राहों में पलके बिछाए हुए
आस का दीप दिल में जलाए हुए
मुस्कुरा के सभी से मैं मिलता रहा
नम आँखों को सबसे छुपाये हुए

कोशिशें मैंने कर ली बहुत हैं मगर
दिल कहीं भी दोबारा है लगता नहीं
तट पे बैठा नदी से मैं पूछूं बता,
क्या तट नदी से दोबारा है मिलता कभी?
—रोहित तिवारी
एक दिन पहले
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