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अधिकार की आवाज़

Rohit Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज गर तुम चुप रहोगे
        
                                                    
                            
कल बोलना धिक्कार होगा
बाद में फिर बोलने का
क्या तुम्हें अधिकार होगा

जन्म से दोषी हो तुम
कानून वो बना रहे है
खोदकर खाई को देखो
समानता वो ला रहे हैं

एक आवाज से तुम्हारी
पीढ़ियों पर उपकार होगा
आज गर तुम चुप रहोगे
कल बोलना धिक्कार होगा

स्वार्थ की राजनीति में
देश कब तक बँटता रहेगा
ऊँची कोठियों की नींव में
आमजन कबतक सिसकता रहेगा

लाचार हो माँ भारती तो
क्या तुम्हें स्वीकार होगा
आज गर तुम चुप रहोगे
कल बोलना धिक्कार होगा

प्रतिभाओं का दमनकर
हम हैं विश्वगुरु की राहपर
वो अंधकार को दूर करेंगे
देखो सूरज को तबाह कर

देखो ऐसी नीतियों का
हमसे ना नमस्कार होगा
आज गर तुम चुप रहोगे
कल बोलना धिक्कार होगा
एक महीने पहले
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