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शादी का लड्डू

Rohit Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ब्याह रचाकर फँस गया भाई,
        
                                                    
                            
मिली न उसको कहीं विदाई।

हाथ में बेलन बीवी लाई,
शामत आफत साथ में आई।

खत्म हुई अब सब आज़ादी,
महँगी पड़ गई हमको शादी।

जेब हुई है बिल्कुल खाली,
रबड़ी खाती घर की वाली।

मॉल बुलाकर सूट दिलाया,
क्रेडिट कार्ड बैंड बजवाया।

भारी झोले चौड़े-चौड़े,
दूल्हे राजा पीछे दौड़े।

आदर-भेंट बहुत कुछ पाया,
साले साहब ने चमकाया।

पर घर आते ही सब बदला,
सूख गया जो पति था तगड़ा।

सुख से कुँआरे घूम रहे हैं,
मस्ती के संग झूम रहे हैं।

ब्याह रचाना मत तुम भाई,
लड्डू खाकर आफत आई।
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
एक महीने पहले
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