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सरकार तुझे झुकना होगा!

Rohit Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सरकार तुझे झुकना होगा, छात्रों ने बगावत कर ली है,
        
                                                    
                            
कहाँ गयी है ज़बां तुम्हारी? तुमने क्यों चुप्पी धर ली है?
देखो जनता आती है तुम बचकर कहाँ पे जाओगे?
कलम छोड़कर कर्णधार ने रण की तैयारी कर ली है।

कागज़ पर जो दांव चले थे, वो सब हमने देख लिए,
साहब! तुम्हारी फाइलों के काले धंधे देख लिए,
पूछ रहा है युवा देश का, कब तक हमें रुलाओगे?
डिग्री लेकर सड़कों पर घूमते वो लड़के देख लिए।

सालों-साल जो रातों को जागे, वो मेहनत बेकार गई,
बेच दिया ईमान किसी ने, बच्चों की तकदीर गई,
तुम तो एलीट रूम में बैठकर चाय की चुस्कियां लेते हो,
यहाँ घरों के चूल्हे बुझ गए, माँ की बूढ़ी आस गई।

लाठी मारो या जेल में डालो, अब पीछे ना हटेंगे हम,
हक़ की खातिर सड़कों पर अब डटकर खड़े रहेंगे हम,
बहुत सह लिया ताना तुम्हारा, बहुत सुन ली झूठी बातें,
इंकलाब का नारा बनकर, गलियों में गूंजेंगे हम।

कुर्सी के इस घमंड को भाई, एक दिन तो टूटना ही है,
जनता के इस सैलाब के आगे, सबको ही झुकना ही है,
आज युवा ने ठान लिया है, अपना हक वो लेकर रहेगा,
इंसाफ की इस लड़ाई को अब, अंजाम तक पहुँचना ही है।
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
4 घंटे पहले
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