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आगमन वसंत का

Rohit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            छटा पीली सरसों की चहुंओर छाई है,
        
                                                    
                            
गेहूँ ने गर्दन आसमाँ की ओर उठाई है,
नव नव पल्लवों ने बात ये पहुंचाई है,
ऋतु वसंत आई है,ऋतु वसंत आई है..
जीवन नदी निरन्तर बहती जाए,
तस्वीर पल पल में बदलती जाए,
इतिहास ने सबक सही सिखाया है,
तदबीर से ही तक़दीर बदलती जाए,
सूरज चाँद सितारों ने बात यही समझाई है…
मन्द मंद बयार गगन को चूमती है,
देखकर आसमाँ झुकता,धरा झूमती है..
खो गई जो फ़िज़ा यहीं कहीं,
वो ख़ुशी में लिपटी घूमती है,
मौसम ने बात यह गुलों को बताई है….
उसकी याद की ख़ुशबू से सराबोर हैं दिन रात मेरे,
साथ है वो हर पल,कहते ये जज़्बात मेरे..
राहें अलग हैं अब,मंज़िलें भी,
फिर लगता है उसके हाथ में हैं हाथ मेरे,
खिलते गुलाब ने,उड़ते गुलाल ने
इक हूक सी उठाई है…
-कुमार रोहित
एक वर्ष पहले
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