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मगर उसके नाम पर दोस्तों का आलिंगन रह गया।

Rituraj solanki

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सावन पंछियों के गुनगुनाने का इंतज़ार करता रहा,
        
                                                    
                            
और मैं गुनगुन के आने का
और हुआ है जब से नशा उसका
भूल गया हु पता मयख़ाने का I

अब आँखों में गुनगुन का प्रतिबिंब रह गया,
उससे ज़िक्र का जहन में स्वप्न रह गया।
सोचा था हमारा प्रेम-संगम,
मगर उसके नाम पर दोस्तों का आलिंगन रह गया।
2 घंटे पहले
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Sanjai kumar

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