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तट सीमित कर लो शहीदों की पत्नियों को समर्पित

Ritu Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तट सीमित कर लो तुम सरिता
        
                                                    
                            
बादल कलह करो धरती से
पवन जमा लो पग तुम अपने
तुम निष्ठुर हो जाओ सूरज

आज दिशाओं के जलवे, हर नही पायें मेरी विवशता
भाग्य ने ये फरमान दिया है ,ना रखूँ तुमसे कोई रिश्ता।

झिगुंर जिह्वा सिल दो अपनी
चारु चंद्र प्रहरी ना बनना
संध्या मत सजना तारो से
कलिका तू रूठ बहारो से

साथ तुम्हारा छोडा मैने ,सखी बनी है ये कर्कशता
आज सजाओ तुम सब जाकर, किसी और जोड़े का रस्ता।

चंदन खुशबू तुम ना लुटाना
हरियाली रंग छोडो अपना
दर्पण जाकर तुम छुप जाओ
दीपक तुम सो जाओ जाकर

आज बसंती रंग मे रंग कर,आने वाला वीर मेरा
बस भारत के पुत्रों मे है ,प्राण लुटाने की ये सहजता।

डाॅ ऋतु


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7 वर्ष पहले
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