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तूफानी वर्षा

Ritu Matawale

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वेग तूफानी चाल मस्तानी,कल-कल करती बहती जाती।
        
                                                    
                            
सागर की चरणों को छूने,ये नदिया प्यारी बहती जाती।
पूर्ण वेग से बहती जाती,सागर को मिलने मचलती जाती।
तेज तूफानी लहरों से,सागर की ओर बहती जाती।
वर्षा की जलधारा से,ओत-पोत होती नदिया की धारा।
बहा कर भी ले जाते हैं, बसे झोफडी नदियो के किनारा।
पूर्ण वेग से बहती ,ये नदियो की जलधारा।
पेड़ पौधों को भी उखाड़ फेके,नदियो के किनारा।
बर्षा की जल से भर गई,नदियों के हर किनारा।
बहती नदिया लगती है, जैसे हो सागर का किनारा।
खेतो और खलियानों से हो कर,मिलती है वर्षा की धारा।
तूफान भरे हवावो से,बरसती है आसमान से वर्षा की धारा।
गली कूचे चैराहो में,बह रही है वर्षा की धारा।
सूखे घर के अंदर भी,कहर ढा रही है वर्षा की धारा।
तूफानी वेग से ,बरस रही है वर्षा की धारा।
अस्त व्यस्त हो गई है, जग के जीवन सारा।
गली कूचे चौराहों में ,बह रही है वर्षा की धारा।
कई झोपड़ी टूटे,कई हो गए हैं घर से बेघर बेचारा।
कई भूख से बिलख रहे हैं, कोई नही है सहारा।
कोई बढ़ में फंसे हैं, घर से बेघर हो गए बेचारा।
वर्ष की ये तूफानी वेग,कहर बरसा रहा है।
लोगो के सूचना सम्पर्क से,लोगो को दूर कर रहा है।
तूफानी शैलाब बन कर,लोगो पर कहर ढा रहा है।
नदियो के जल स्तर,खतरो के ऊँचाई से बह रहा है।
नदियो की जलधारा,सागर से मिलने को तड़फ रहा है।
अपने मिलन की आस में,तूफानी वेग से बह रहा है।
ये तूफानी वर्षा के जल,लोगो पर कहर ढा रहा है।
कई गांव डूबा,कई घर फूटे कई परिवार बिछड़ गए हैं।
ये वर्षा की तूफानी कहर से,कोई बचा नही है।
नदी नाले पूर्ण वेग से,सागर को मिलने तरस रहे हैं।
तूफानी लहरों से,नदिया का जल मस्ती में बह रहे हैं।
झरनो के जल भी,खतरे के निशानी से बह रहे हैं।
सभी जल एक साथ मिल कर,सागर सा लग रहे हैं।
नदियो के संगम स्थल के,पवित्र मंदिर भी डूब यगे है।
जिधर भी देखो,जग पानी ही पानी लग रहा है।
ये मौसम की मार, तूफानी कहर ढा रहा है।
लोगो का जीवन अस्त व्यस्त, होते जा रहा है।
यातायात के साधन भी,वर्षा के कारण रुक गया है।
लोग अपने घरों से,बहार नही निकल रहे हैं।
लोगो की घर की ,कच्ची इट का दीवाल ढह रहा है।
घर रहते हुवे भी लोग,बेघर हो रहा है।
लोग तम्बू में रहने को,मजबूर हो रहा है।
ये वर्षा रुकती नही,लोगो के जीवन मे कहर ढा रहा है।
तूफानी वेग से,नदियो का जल बह रहा है।
सागर को मिलने ये,नदिया तरस रहे है।
वर्षा के जल से,ये जीवन अस्त व्यस्त हो रहा है।
नदियो का जल स्तर, खतरों से भी आगे बह रहा है।
जलमग्न हो गया है, जिधर भी देखो पानी ही दिख रहा है।
राहत और बचाव का,शिलशिला चल रहा है।
टूटे झोफडी को छोड़,लोग तम्बू में निवास कर रहा है।
ये तूफानी वर्षा ,लोगो के जीवन अस्त व्यस्त कर रहा है।
नदिया की जल,सागर से मिलने को तड़फ रहा है।
वर्षा की कहर से,जन -जीवन तड़फ रहा है।
आसमान से तूफानी वेग से,ये वर्षा बरस रहा है।
धरती के जन-जीवन,इस कदर से मर रहा है।
तूफानी वर्षा अब,रुकने का नाम नही ले रहा है।
बांधो के जल भराव से,जल निकासी का गेट खोला जा रहा है।
नदियो का जलस्तर,अब और रौद्र रूप के रहा है।
ये तूफानी वर्षा,लोगो का जीवन अस्त -व्यस्त कर रहा है।
नदियो की जल धारा,सागर से मिलने को तड़फ रहा है।
भूखंड के हर कोने-कोने,जलमग्न दिखाई दे रहा है।
मानो समुद्र ,धरती के हर कोने में दिखाई दे रहा है।
नदियो की जलधारा,सागर से मिलने को तड़फ रही है।
पूर्ण तूफानी वेग से,नदियो की जलधारा बह रही है।
नदियो की जलधारा ,सागर से मिलने को तड़फ रही है।
ये वर्षा की जलधारा,जग में कहर ढा रही है।
नदियो की जलधारा,सागर से मिलने को तड़फ रही है।
एक घंटा पहले
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