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अब तो मान जाओ

ritesh ranjan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़ुद ही आ जाते पास तो बेहतर होता
        
                                                    
                            
वरना पास आना भी हम जानते है

कहा करते है हर किसी से। इश्क़ अब हम
जिससे करते उससे निभाना जानते है

तभी तो उदास नहीं होते किसी के रूठने पे
क्योंकि हम रूठे दिल को मानना जानते है

तू कब तक भिंगाओगी अपने लिबास आंसुओं से
आ जाओ मेरे पास आंसुओं को पोछना जानते है

मुझे मालूम है तेरे बिखरे जुल्फों की वजह
पास आकर तो देखो संवारना जानते हैं

गुलाबी होठें यूहीं नहीं सूखती बारिशों में भी
प्यासी होठों के प्यास बुझाना जानते है

इश्क़ करने वाले अक्सर बच जाते हैं समंदर में डूबने से
क्योंकि वो किसी के निगाहों में डूबना जानते है

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4 वर्ष पहले
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