विज्ञापन

शिकारी

Rishabh Bhatt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अरमानों के बादलों को,
        
                                                    
                            
बारी–बारी ले गया,
जुनूं से छीन मेरे,
जानिसार ले गया,

फड़फड़ाता हूँ देख उसको,
जो ख्वाबों की मेरे पिटारी ले गया,

बिन जाल के शिकारी ले गया,
वो परियों को हमारी ले गया,

चांद का दीया बुझा,
रौशनी आंखों पे आनी बंद हुई,
तस्वीर को पकड़ उसके,
एक कमरे में जवानी बंद हुई,

वो आसरों का मेरे,
बन उम्मीद आया ही नहीं,
छिड़ककर तेल यादों पे उसकी,
आजतक मैंने जलाया ही नहीं,

हक़ीक़त से परे,
जहां अनजानी ले गया,

जान ही नहीं,
जिंदगानी ले गया,

सुरमई एक साख के बदले,
परिंदों से उड़ान आसमानी ले गया,

तह में छिपी हर निशानी ले गया,
दिल का मेरे दिलजानी ले गया।
– ऋषभ भट्ट
8 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Adv DK Kanojiya

71 कविताएं

View Profile