क्षण व्याकुल हो श्रोता बोला,
अविरल रण व्याख्यान कहो,
सजल राष्ट्र में आगम अरि का,
जन-जन का बलिदान कहो,
शौर्य कहो उन राजा की,
उन पर अरि व्याधान कहो,
हे ज्ञानश्रेष्ठ विस्तार रूप में,
संगर का आख्यान कहो,
अब देर करो न ज्ञानी तुम,
मन जीवनमरू में प्यासी है,
रसपान करू अज्ञेय कथा,
अब विकल सांस अभिलाषी है।