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तुममें और उलझती जा रही हूं

Rawat Rajni

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुममें और उलझती जा रही हूं
        
                                                    
                            
तुमको मैं समझती जा रही हूं
पहले किताब बंद सी थी थोड़ी
अब थोड़ा थोड़ा खुलती जा रही हूं
कैद थी फूलों में खुशबू की तरह और बंद थी कलियों में शबनम की तरह
मिली जो तुमसे हवा में बिखरती जा रही हूं
समझने को बैठूं जो तुम्हें जरा
इक कतरा जो समझने बैठूं तुम्हें बस हर लम्हा तुममें उलझती जा रही हूं
3 महीने पहले
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