तुममें और उलझती जा रही हूं
तुमको मैं समझती जा रही हूं
पहले किताब बंद सी थी थोड़ी
अब थोड़ा थोड़ा खुलती जा रही हूं
कैद थी फूलों में खुशबू की तरह और बंद थी कलियों में शबनम की तरह
मिली जो तुमसे हवा में बिखरती जा रही हूं
समझने को बैठूं जो तुम्हें जरा
इक कतरा जो समझने बैठूं तुम्हें बस हर लम्हा तुममें उलझती जा रही हूं
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