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केरल त्रासदी...

Ravindra Shrivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            है भीषण ये कुदरत का कहर,
        
                                                    
                            
जहाँ प्रकोप से जलमग्न हुए शहर,
प्राणी में त्राहि-त्राहि मची हुई है,
आत्मा भी आज कारुणिक हुई है....

हज़ारों घर धरती विहीन हुए,
सैकड़ों मानवों नें अपनें प्राण खोए,
माँ अपनें बेटों से बिछड़ गई,
शायद काल के गाल में समा गई...

केरल की ये भीषण त्रासदी,
हृदय को अंदर से झकझोर दिया,
इस निर्दय प्रलयंकारी आपदा ने,
कितनों को अन्तर्मन से तोड़ दिया...

अपनों ने अपनों को खोया,
जानें कितनों ने सपनों को खोया,
ये खोने का ग़म हृदयविदारक है,
अब प्रभु ही इस प्रलय के सुधारक हैं...

हे भगवन..! कृपा हो तुम्हारी उनपर,
जो बीच मझधार में फँसे हुए हैं,
बस आस तुम्हारी ही है उनको,
तत्काल कृपा करो, जरूरत है जिनको...

- रविन्द्र श्रीवास्तव
छपरा, बिहार
9717135385

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8 वर्ष पहले
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