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परछाइयों से आगे भी कभी...

Ravindra Sardeshmukh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            परछाइयों से आगे भी कभी निकलना सीखो
        
                                                    
                            
ज्वाला की तरह प्रच्छन्न होकर मचलना सीखो
सरजमीं की खिदमत में न्यौछावर जो हुए
उनके किरदारों से जीवन में संभलना सीखो
है आसमां लुभाता तो ख्वाबों को संवारो
उड़ानों को पा लो जमीं से जुडे रहना सीखो
सौगात में पाया है उसे ठुकरा ना देना कभी
वेद मंत्र शाश्वत है उन्हें संस्कार बनाना सीखो
ज्ञान का भंडार लिए बैठें है जो आसपास
उनके सानिध्य में रहकर खुद को आजमाना सीखो
हम सब की बागडोर संभाले हुआ है जो
उस परमात्मा को आत्मा से मिलाना सीखो
होती है दिक्कत ज़रूर मगर हौसला रखो
ध्येय की तरफ बढ़ते हुए विश्वास जगाना सीखो
-कवि 'रवि'
2 महीने पहले
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