उठो, जागो, और तब तक संघर्ष करो ;
लक्ष्य की प्राप्ति जब तक, तुम ना करो।
किसी समस्याओं से पीछे, तुम ना मुड़ो ;
अपने सपने को अधुरा, तुम ना छोड़ो ।
जरा सोचो, यहां तक, क्यों तुम आए हो ;
सैकड़ो मुसीबतों से पार होकर, यहां आए हो l
ना जाने आगे बढ़ने से, क्यों तुम घबराते हो ;
अपने सपनों को सीने में, क्यों तुम दफनाते हो।
पढ़ लिख कर कुछ करोगे, तो नाम होगा ;
बीच में छोड़ने से केवल, पश्चाताप होगा ।
तुमसे ही तो, माता-पिता की आशाएं हैं ;
तुम्हारी सफलता को वे, दर-दर मांगी दुआएं हैं ।
मत भूलो वो रातें, जो मां ने, रोकर बिताएँ हैं ;
हर वह दिन और रात, जो पिता ने सिर्फ, तुम्हारे लिए कमाएं हैं ।
कैसे बिखरने दोगे, तुम उन आशाओं को ;
क्या अब भी सीने में, दफन करोगे, तुम अपनी भावनाओं को।
उठो, अब बहुत कर ली तुमने मनमानी है ;
सपना अपना साकार कर, तुमको दिखलानी है ।
माँ की तकलीफों के बारे में, तुम्हें है सोचना ;
माँ की बहते आंसुओं को, तुम्हें है पोंछना ।
भाई की पढ़ाई अब बस तुम्हें ही है पूरी करानी ;
बहन की शादी भी तो अब तुम्हें ही है करानी ।
बनकर अब नादान, तुम्हें नहीं है रहना ;
राहों में हर कदम फूंक कर, तुम्हें है चलना।
पिता थककर लाचार हुए, उनको आराम फरमाना है ;
बेटा उनका बड़ा हुआ है, तुमको बतलाना है।
अब तुम समझ चुके , तुम्हें एहसास ये दिलाना है ;
घर के जिम्मेदारियों को निभा कर, बेटे का फर्ज , अब तुम्हें निभाना है।