आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

विद्यार्थी जीवन की अभिप्रेरणा

                
                                                         
                            उठो, जागो, और तब तक संघर्ष करो ;   
                                                                 
                            
लक्ष्य की प्राप्ति  जब तक, तुम ना करो। 
किसी समस्याओं से पीछे, तुम ना मुड़ो ;  
अपने सपने को अधुरा, तुम ना छोड़ो ।   

जरा सोचो,  यहां तक, क्यों तुम आए हो ; 
सैकड़ो मुसीबतों से पार होकर, यहां आए हो l
ना जाने आगे बढ़ने से, क्यों तुम घबराते हो ;
अपने सपनों को सीने में, क्यों तुम दफनाते हो।

पढ़ लिख कर कुछ करोगे, तो नाम होगा ;
बीच में छोड़ने से केवल, पश्चाताप होगा ।
तुमसे ही तो, माता-पिता की आशाएं हैं ;
तुम्हारी सफलता को वे, दर-दर मांगी दुआएं हैं ।

मत भूलो वो रातें, जो मां ने, रोकर बिताएँ हैं ;
हर वह दिन और रात, जो पिता ने सिर्फ, तुम्हारे लिए कमाएं हैं ।
कैसे  बिखरने दोगे, तुम उन आशाओं को ;
क्या अब भी सीने में, दफन करोगे, तुम अपनी भावनाओं को।

उठो, अब बहुत कर ली तुमने मनमानी है ;
सपना अपना साकार कर, तुमको दिखलानी है ।
माँ की तकलीफों के बारे में, तुम्हें है सोचना ;
माँ की बहते आंसुओं को, तुम्हें है पोंछना ।

भाई की पढ़ाई अब बस तुम्हें ही है पूरी करानी ;
बहन की शादी भी तो अब तुम्हें ही है करानी ।
बनकर अब नादान, तुम्हें नहीं है रहना ;
राहों में हर कदम फूंक  कर, तुम्हें है चलना।

पिता थककर लाचार हुए, उनको आराम फरमाना है ;
बेटा उनका बड़ा हुआ है,  तुमको बतलाना है।
अब तुम समझ चुके , तुम्हें  एहसास ये दिलाना है ;
घर के जिम्मेदारियों को निभा कर, बेटे का फर्ज , अब  तुम्हें निभाना है।

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर