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कहाँ खोजे तू उसे, जो तेरे ही पास है, हर क़दम पे साथ तेरे, वो अदृश्य विश्वास है

Ravi Nishayar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहाँ खोजे तू उसे, जो तेरे ही पास है
        
                                                    
                            
हर धड़कन में बसा वो, हर सांस में खास है

बूँद-बूँद में वही है, सागर की प्यास है
आंख बंद कर देख ज़रा, वो तेरे आसपास है

कहाँ खोजे तू उसे, जो तेरे ही पास है...

मंदिर की घंटियों में, वो गूंजता सुर है
मुस्कान में बच्चे की, वही सच्चा नूर है
राहों के हर मोड़ पे, उसकी ही आस है
तू समझे अगर दिल से, वही हर एक एहसास है..

कहाँ खोजे तू उसे, जो तेरे ही पास है...

जो भी तू देगा जग को, वही लौट आएगा
कर्मों का ये चक्र तुझे, सच्चा फल दिलाएगा
नेकी की राहों में, कभी न निराश है
हर क़दम पे साथ तेरे, वो अदृश्य विश्वास है

कहाँ खोजे तू उसे, जो तेरे ही पास है...

रूप बदलकर आए वो, पहचान ना पाए तू
कभी गरीब के चेहरे में, कभी साधु के भेष में वो तू
दिल अगर साफ़ रखे, तो हर दिन उजास है
हर जन में हरि दिखे, तो जीवन सुवास है

कहाँ खोजे तू उसे, जो तेरे ही पास है...

परीक्षा की घड़ी में, वो चुपचाप देखता
तेरी श्रद्धा की गहराई, हर पल वो परखता
सच्चे दिल से पुकारे, तो मिलता अविनाश है
पत्थर भी फूल बन जाए, अगर सच्चा विश्वास है

कहाँ खोजे तू उसे, जो तेरे ही पास है
हर धड़कन में बसा वो, हर सांस में खास है…
3 महीने पहले
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