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वर्षा आगमन

Ravi Kumar Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बारिश की पहली बूँद
        
                                                    
                            
कैलाश में चमक उठी,
मिट्टी भीगने को उतावली हो उठी।
कभी लहरें भी पुकारा करती थीं,
अब यह बिजली कह उठी।

चलो खेतों की ओर,
कि फ़सल मचल उठी।
किसान की आस जागी
और झरने तड़प उठी।

मोर थिरक उठा,
कौतूहल ही कौतूहल समाँ में छा गया।
दरकार जल की जाग उठी,
कदम अग्रसर हुए उन्नति की ओर,
और समय चीख उठी!
3 महीने पहले
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