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अंतिम श्वास

Ratna Pathak

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हुआ अत्याचार लूटी गई इज्जत
        
                                                    
                            
किया उस कसौटी पे खरा जहाँ बंजर है जमीन
चीखता बिलखता हुआ शरीर तोरता हर नज्म को
थामने को अपनी अंतिम श्वास
निकलना चाहता है जैसे अँधेरे से उजोर की ओर
और पा लेना चाहते हो वो आसमान जो गले लगाता है उन स्वतंत्रता पक्षियों को हर दिन
मेहसूस करना चाहता है प्रकृति का वो गीत जो शायद भुला दे वो
सौदेबाज़ी
जिसे किया है अपनो ने उसके साथ
पार करना चाहता है धोखेबाजी का वो रिश्ता जिसने नोचा है
उसके पैरों का मांस उसे अपाहिज बनाने केलिए....
एक दिन पहले
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Aditya Mishra

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