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टूटते सितारों से कुछ मांग लिया

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हारी आँखें क्यों आज कुछ नम हैं,
        
                                                    
                            
क्या टूटते सितारे से कुछ माँग लिया था?
या दिल ने फिर किसी ख़्वाब को अपना समझकर,
ख़ामोशी में उसका नाम पुकार लिया था?

होंठों पर हँसी है, मगर आँखें उदास हैं,
लगता है किसी याद ने फिर दिल को छुआ था।
कहते तो हो कि सब कुछ ठीक है तुम्हारे यहाँ,
फिर किस दर्द ने आज तुम्हें यूँ चुप किया था?

हमसे छुपाओगे तो ये आँखें कह जाएँगी,
इनमें किसी अधूरे ख़्वाब का अफ़साना था।
तुमने सितारे से क्या माँगा, ये तो पता नहीं,
मगर मेरी दुआ में हमेशा तुम्हारा ठिकाना था।

अगर माँगा है उसे, तो मिल जाए तुम्हें वो,
जिसके लिए दिल ने रात-रात भर दुआ की थी।
और अगर माँगा है कोई मुझे भी कभी,
तो समझूँगा मेरी किस्मत ने वफ़ा की थी।
-रतन कुमार कैथवास
एक महीने पहले
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