आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

टूटते सितारों से कुछ मांग लिया

                
                                                         
                            तुम्हारी आँखें क्यों आज कुछ नम हैं,
                                                                 
                            
क्या टूटते सितारे से कुछ माँग लिया था?
या दिल ने फिर किसी ख़्वाब को अपना समझकर,
ख़ामोशी में उसका नाम पुकार लिया था?

होंठों पर हँसी है, मगर आँखें उदास हैं,
लगता है किसी याद ने फिर दिल को छुआ था।
कहते तो हो कि सब कुछ ठीक है तुम्हारे यहाँ,
फिर किस दर्द ने आज तुम्हें यूँ चुप किया था?

हमसे छुपाओगे तो ये आँखें कह जाएँगी,
इनमें किसी अधूरे ख़्वाब का अफ़साना था।
तुमने सितारे से क्या माँगा, ये तो पता नहीं,
मगर मेरी दुआ में हमेशा तुम्हारा ठिकाना था।

अगर माँगा है उसे, तो मिल जाए तुम्हें वो,
जिसके लिए दिल ने रात-रात भर दुआ की थी।
और अगर माँगा है कोई मुझे भी कभी,
तो समझूँगा मेरी किस्मत ने वफ़ा की थी।
-रतन कुमार कैथवास
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर