समय बाँध तो पाए, बाँध न पाए तेरे नैनों का खारा पानी,
मिट्टी की ख़ातिर बहता लहू भी लिखता है कुर्बानी की कहानी।
सीमा पर खड़े वीरों ने जब हँसकर मौत को गले लगाया,
भारत माँ की रक्षा में हर बेटे ने फ़र्ज़ निभाया।
आँखों में आँसू, सीने में ज्वाला, दिल में हिंदुस्तान,
माटी के क़र्ज़ को चुकाना ही है वीरों की असली पहचान।
तिरंगे की शान में झुक जाएँ, ये जीवन और जवानी,
देश के नाम समर्पित हर साँस, यही हमारी अमर निशानी।
-रतन कुमार कैथवास