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मुट्ठी में आसमान कर देंगे

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अभी ख़ामोश हैं, इसे हमारी हार मत समझना,
        
                                                    
                            
समंदर ठहरा है, इसे कमज़ोर लहर मत समझना।

जब वक़्त आएगा, अपना मुक़द्दर ख़ुद लिखेंगे,
हम वो नहीं जो हालात से समझौता कर लेंगे।

अभी पाँव ज़मीन पर हैं, मगर नज़र आसमान पर है,
हमारी हर ख़ामोशी आने वाले तूफ़ान पर है।

जो आज काँटे बो रहे हैं मेरी राहों में,
कल उन्हें भी हैरानी होगी मेरी उड़ानों में।

वक़्त की किताब में हर चेहरे का हिसाब रहेगा,
किसने दिया था ज़ख़्म, किसका प्यार लाजवाब रहेगा।

हम बदला नहीं, अपनी पहचान लेकर आएँगे,
जो हमें मिटाने निकले, हम उनसे आगे निकल जाएँगे।

काँटों की फ़ितरत में ख़ुशबू कहाँ से आएगी,
बुरी सोहबत में इंसानियत कहाँ नज़र आएगी।

गुलाब बनना है तो अपने किरदार को सँवार,
सिर्फ़ चेहरे की चमक से कोई महक नहीं आएगी।

मेरे ख़्वाबों की ऊँचाई का अंदाज़ा लगाना अभी रहने दो,
मेरे हौसलों को वक़्त की कसौटी पर बहने दो।

जिस दिन अपनी मेहनत का सूरज चमक जाएगा,
आज का हर ताना ख़ुद-ब-ख़ुद जवाब बन जाएगा।

मौका मिला तो मुट्ठी में आसमान कर देंगे,
जो हमें रोकते हैं, उन्हें हैरान कर देंगे।

वक़्त हर चेहरे को पहचानता है, ऐ दोस्त,
हम ख़ामोश रहेंगे, मगर अपने काम से बयान कर देंगे।
-रतन कुमार कैथवास
2 घंटे पहले
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