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मन अब शिवाला हुआ

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रात ढलती रही, लूट के सपनों को मेरे,
        
                                                    
                            
दिन मचलता रहा, बस चाँदनी के लिए।
राह वीरान थी, फिर भी चलता रहा,
मन तरसता रहा, तेरी रोशनी के लिए।

चाँद निकला तो कुछ बात बनती गई,
खामोश रातों में बरसात छनती गई।
तेरी यादों ने जब छुआ दिल मेरा,
हर धड़कन मचलती रही जिंदगी के लिए।

सफर में तेरे मन अब शिवाला हुआ,
हर कदम जैसे कोई उजाला हुआ।
जिस तरफ तू मिला, वो दिशा बन गई,
हर दुआ बन गई बंदगी के लिए।

मैंने ईश्वर से माँगा न कुछ भी कभी,
बस तेरे साथ चलने की चाहत रही।
राह काँटों भरी थी मगर क्या गिला,
दर्द भी चुन लिया उस सनम के लिए।

रात कितनी भी लंबी हो, ढलती रही,
मेरी उम्मीद भीतर मगर जलती रही।
चाँदनी दूर थी, फिर भी चलता रहा,
एक किरण चाहिए जिंदगी के लिए।

अब न मंज़िल की जल्दी, न राहों का डर,
तेरा साथ हो तो सफर ही सफर।
मन शिवाला हुआ, दिल ने पूजा तुझे,
अब कमी क्या रही बंदगी के लिए।

रात ढलती रही, चाँद आता रहा,
तेरा एहसास दिल में समाता रहा।
मैं मुसाफ़िर रहा, तू सहारा बना,
और जीवन मिला फिर से जीने के लिए।
-रतन कुमार कैथवास
2 महीने पहले
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