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कितनी और कहानी होगी

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अजीब उमंग है, जोश है, कुछ पुरानी यादें हैं,
        
                                                    
                            
गीत भी हैं, संगीत भी है, दिल में कई फ़रियादें हैं।

साहिल भी है, जज़्बा भी है, लहरों में रवानी है,
सब कुछ तो है इस सफ़र में, बस तेरी कमी पुरानी है।

अगर नहीं है तो तू नहीं है, फिर किस बात की रौनक है,
तेरे बिन ये महफ़िल कैसी, हर ख़ुशी जैसे बेरौनक है।

कब आओगे, ये पूछ रहा है दिल हर शाम-सवेरे,
कब तक देखूँ राह तुम्हारी, कब मिलेंगे चाँद-सितारे मेरे।

क्या ये ख़्वाब ही रह जाएगा, या नज़र-ए-इनायत होगी,
सूनी आँखों की इस दुनिया में फिर कोई मुलाक़ात होगी।

कैसा सफ़र है हम दोनों की ज़िंदगी की राहों का,
कभी धूप मिली है हमको, कभी मौसम मिला निगाहों का।

कितनी दूर तलक चलना है, कितनी और रवानी होगी,
कितने मोड़ अभी बाक़ी हैं, कितनी और कहानी होगी।

उलफ़त अगर इम्तिहान है तो इम्तिहान भी सह लेंगे,
तू बस एक बार बुला लेना, हम हर दूरी तय कर लेंगे।

कल क्या होगा किसने जाना, आज मगर ये आस रहे,
तू आए तो ये सफ़र हमारा सच में कोई ख़ास रहे।
-रतन कुमार कैथवास
17 घंटे पहले
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