आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कितनी और कहानी होगी

                
                                                         
                            अजीब उमंग है, जोश है, कुछ पुरानी यादें हैं,
                                                                 
                            
गीत भी हैं, संगीत भी है, दिल में कई फ़रियादें हैं।

साहिल भी है, जज़्बा भी है, लहरों में रवानी है,
सब कुछ तो है इस सफ़र में, बस तेरी कमी पुरानी है।

अगर नहीं है तो तू नहीं है, फिर किस बात की रौनक है,
तेरे बिन ये महफ़िल कैसी, हर ख़ुशी जैसे बेरौनक है।

कब आओगे, ये पूछ रहा है दिल हर शाम-सवेरे,
कब तक देखूँ राह तुम्हारी, कब मिलेंगे चाँद-सितारे मेरे।

क्या ये ख़्वाब ही रह जाएगा, या नज़र-ए-इनायत होगी,
सूनी आँखों की इस दुनिया में फिर कोई मुलाक़ात होगी।

कैसा सफ़र है हम दोनों की ज़िंदगी की राहों का,
कभी धूप मिली है हमको, कभी मौसम मिला निगाहों का।

कितनी दूर तलक चलना है, कितनी और रवानी होगी,
कितने मोड़ अभी बाक़ी हैं, कितनी और कहानी होगी।

उलफ़त अगर इम्तिहान है तो इम्तिहान भी सह लेंगे,
तू बस एक बार बुला लेना, हम हर दूरी तय कर लेंगे।

कल क्या होगा किसने जाना, आज मगर ये आस रहे,
तू आए तो ये सफ़र हमारा सच में कोई ख़ास रहे।
-रतन कुमार कैथवास
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
14 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर