ज़िद उसी चीज़ की है, जिसे नामुमकिन कहा ज़माने ने,
हमें हासिल वही करना है, जिसे तक़दीर ने भी न लिखा हो फ़साने में।
ख़्वाहिश वो नहीं जो आसानी से मुकम्मल हो जाए,
मंज़िल वो नहीं जो बिना संघर्ष हासिल हो जाए।
ज़िद हो अगर सीने में तो पत्थर भी पिघलते हैं,
इरादों के आगे बंद दरवाज़े भी खुलते हैं।
जिसे दुनिया ने मेरी पहुँच से बाहर बताया है,
उसी ख़्वाब ने मेरे भीतर तूफ़ान जगाया है।
अब फ़ैसला मुक़द्दर की लकीरें नहीं करेंगी,
मेरी मेहनत ने अपना अलग रास्ता बनाया है।
-रतन कुमार कैथवास