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दिल का आकार नहीं, एहसास बड़ा होना चाहिए

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बड़प्पन न दौलत से, न ऊँचे मक़ाम से होता है,
        
                                                    
                            
दिल में करुणा हो तो इंसान महान होता है।

दिल का आकार नहीं, एहसास बड़ा होना चाहिए,
किसी के आँसू पोंछने का प्रयास बड़ा होना चाहिए।

जिसे दूसरों के दर्द से कोई वास्ता नहीं,
उसके पास सब कुछ हो, फिर भी कुछ ख़ास नहीं।

विज्ञान शरीर की भाषा को पहचानता है,
संवेदना इंसान के भीतर का इंसान जानता है।

एक दिल का बढ़ना जाँच का विषय हो सकता है,
दूसरे दिल का बढ़ना समाज के लिए गौरव हो सकता है।

दिल का बड़ा होना विज्ञान में बीमारी कहलाता है,
संवेदना में वही बड़प्पन इंसान को महान बनाता है।

जिस दिल में पूरी दुनिया के दर्द की जगह हो,
वही दिल इंसानियत का असली मुक़ाम कहलाता है।
-रतन कुमार कैथवास
2 घंटे पहले
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