विज्ञापन

बादलों के पहरे में मेरा शहर

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बादलों के पहरे में मेरा शहर क्यों उदास है,
        
                                                    
                            
हर गली में आज बारिश का ही एहसास है।

उस पार्क में तो पानी भरा है इन दिनों,
जहाँ मिलना तुम्हारा रोज़ का विश्वास है।

वही बेंच अब भीगी हुई चुपचाप बैठी है,
उसे शायद हमारे लौट आने की आस है।

जिस रास्ते पर साथ चलते थे बेफिक्र कभी,
आज उस रास्ते पर तन्हाई का वास है।

बारिश ने मिटा दिए कदमों के सारे निशाँ,
मगर दिल में तुम्हारा नाम आज भी खास है।

मौसम बदल गया, शहर भी बदल गया मगर,
हमारी मुलाक़ातों का किस्सा कहाँ उदास है?

तुम कहो तो फिर किसी शाम वहीं मिल लें,
भीगता हुआ शहर भी आज हमारे पास है।
-रतन कुमार कैथवास
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

RATAN KUMAR

637 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

416 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10393 कविताएं

View Profile