जो बात थी दिल में, वो दिल से ही कही होती,
रिश्ते को ज़रा तुमने अपना तो समझा होता।
दुनिया ने जो कह डाला, तुमने वही मान लिया,
एक बार मेरी आँखों में झाँक तो लिया होता।
इल्ज़ाम अगर देना था, देते मुझे सामने से,
पीठ पीछे किसी और से, न फ़ैसला किया होता।
हम ख़ामोश थे, तो इसका मतलब ये नहीं था,
तुमने जो पुकारा होता, हमने भी तो सुना होता।
दूरी तो मुक़द्दर की थी, मगर इतनी भी क्या थी,
एक कदम तुम बढ़ाते, एक कदम हम चले होते।
अब बात निकलती है, तो अफ़सोस यही है,
कुछ तुमने कहा होता, कुछ हमने कहा होता।
-रतन कुमार कैथवास